9/03/2017

जो पूछे जान किसकी है..

देशभक्ति गीत/-डॉ.अभिज्ञात
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जो पूछे जान किसकी है, कहोगे मातृभूमि की !
तरक्कियों की सीढ़ियाँ, गढ़ोगे मातृभूमि की!
मातृभूमि प्यारी है, जहां में सबसे न्यारी है
इसलिए तो जान उसपे देने की तैयारी है।।


युद्ध के समय अगर पुकारें माता भारतीl
जवान बेटे ख़ुद कहें उतारो मेरी आरती l
हो काफ़िलों पे काफ़िलों का अन्तहीन सिलसिला l
कफ़न को ओढ़ दुश्मनों पे टूटने का हौसलाl
तुम स्वाभिमानी हार ना, सहोगे मातृभूमि की !!

हो शांतिदूत विश्व के, यही तुम्हारी अस्मिताl
विपत्तियों को रोक ले, वही है सच्ची वीरताl
डरो नहीं हटो नहीं, हो कोई बाधा सामनेl
तुम्हारा कीर्ति पथ वही, जिसे चुना था राम नेl
तुम संस्कृति की बन नदी बहोगे मातृभूमि की !!

7/27/2017

इतिहास कभी कायर का नहीं

जब जब धरती ने मांगी है बेटों की कुर्बानी !
सबसे पहले निकल के आये सारे हिन्दुस्तानी !
वंदे मातरम् वंदे मातरम्‌ ! वंदे मातरम् वंदे मातरम् !
मेरी आन है, मेरी शान है, मेरा इंडिया तू महान है
तेरी बात सबसे जुदा है और तेरी ठोकरों में जहान है!


दिलदार नहीं इनके जैसा, पर सावधान जब अनबन हो !
तब देख इरादे फौलादी सीना छत्तीस या छप्पन हो!
रुख तूफ़ानों का मोड़ दिया जब भी दिल ने जिद ठानी!
वंदे मातरम् वंदे मातरम्‌ ! वंदे मातरम् वंदे मातरम् !
तू ही धर्म है, तू ईमान है, मुझे देश रब के समान है
ये गुलाम तेरा मुरीद है, तू बुलंदियों का निशान है!

जहां स्वाभिमान की ख़ातिर सिर कटते हैं मगर झुकते ही नहीं !
जहां रणभेरी की सुन पुकार बढ़ चले क़दम रुकते ही नहीं !
ये लाजवाब, ये बेमिसाल, इनका न कोई भी सानी !
वंदे मातरम् वंदे मातरम्‌ ! वंदे मातरम् वंदे मातरम् !
मेरे शब्द का तू ही अर्थ है, मेरे लब पे तेरी ज़ुबान है
मेरा बोलना मेरी बतकही, तेरा राग है तेरा गान है !

जो देश के काम नहीं आये धिक्कार जवानी उनकी है !
इतिहास कभी कायर का नहीं, जो शहीद कहानी उनकी है!
उनके ही पांव पखारेगा हर आंख का बहता पानी!!
वंदे मातरम् वंदे मातरम्‌ ! वंदे मातरम् वंदे मातरम् !
तेरी ख़ुशबुओं की कसम मुझे, मैं तेरा हूं इसका गुमान है
तेरे इक इशारे पे मर मिटूं, तेरा तीर हूं तू कमान है!

7/18/2017

अस्सी पार के दोस्त

कविता/डॉ.अभिज्ञात
अस्सी पार के दोस्तों को
जब मैं करता हूं किसी भी कारण अकारण फ़ोन
छूटते ही कहते हैं
अभी ज़िन्दा हूं
जैसे साल में एक बार लिखकर देते हैं पेंशनधारी अपने बैंक को!


दोस्त बताते हैं
अब जब थोड़ी भी होती है उनकी तबीयत ख़राब वे ख़बर नहीं देते
अन्यत्र रहने वाले बाल -बच्चों को
आनन- फानन में पहुँच जाते हैं सब उनके पास एक अघोषित आशंका में
कुछ दिन बाद जब वे लौटते हैं
शर्म आने लगती है अपने जीवित होने पर
आखिर निराश लौटा दिया
कर दी कुछ छुट्टियां ख़त्म बेवजह
इसलिए
अस्सी पार के दोस्त
अपने सम्बंधियों से पहले ही कहते हैं ज़ोर देकर
एकदम ठीकठाक हूं अपनी सुनाओ !!
और उन्हें लगता है
काश ऐसा ही होता !!

अस्सी पार के दोस्त
ज़रा कम पहचानते हैं आवाज़ें, सुनते हैं कुछ कम
उससे भी कम पहचानते हैं चेहरे
पर इस धुंधलके में साफ़-साफ दिखने लगता है बहुत कुछ
जिसे छिपाकर वे ले जाते हैं अपने साथ किसी और जहां में !!

7/14/2017

मेरे गांव की खुशबू

कविता /डॉ.अभिज्ञात
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तुम्हारी केसर क्यारियों से अधिक खुशबूदार है
मेरे गांव से उठ रही ताज़ा होरहे की गंध!

गम- गम महकता अदहन में खौलता मेरे खेतों के ताज़ा धान से बना भात!

भेली बनने को बेताब पाग की खुशबू, जो गन्ने के रस से औंटकर इतरा रही है!

संक्राति के लिए भुजा रहा तिल...
बोरसी में कोयले की आंच पर आवाज देदे पक रहा भुट्टा अपनी खुशबू से कर रहा है निहाल!

घोसार के भाड़ में उछल-उछल कर कूद रहे चने की खुशबू!

खुशबू है पाल खुलते आमों की!

खुशबू है चैत में पककर पेड़ से चुए महुए की !

मेरे उपलों में खुशबू है
खुशबू है गोबर लिपे घर- आंगन में!

कहीं गूलर पका है!
कहीं कोहंड़ा!
कहीं अपनी खुशबू पर दांत चियार रहा है कटहल का कोआ!

यहां आम के मोजर की गंध है
गंध है सरसों के फूलों की
कहीं हरा धनिया पिस रहा है!

खुशबू बता रही है
कहीं ढल रही शाम को पिसा जा रहा है मसाला
और बटलोई में पकने को तैयार है ताज़ा गोश्त !

कहीं महक रहा है अभी- अभी ब्यायी गाय के दूध का फेंसा!

कहीं जतसार की लय पर उठ रही है खूशबू सत्तू के लिए जांत में पिसे जा रहे चने की!

तुम्हारी केसर क्यारियों से अधिक कुछ है मेरे गांव में रची बसी खुशबू में !!

7/13/2017

दुश्मन के लहू से लिखने को इक और कहानी है !


दुश्मन के लहू से लिखने को इक और कहानी है !
खुद अपनी शहादत देने को तैयार जवानी है!!

मांओं ने कहा अब भारत मां का कर्ज़ चुकाना है
बहनों ने कहा अब राखी का ही पर्व मनाना है
कर्तव्य की अब वेदी के लिए मस्तक बलिदानी है !!

सिक्किम से कश्मीर तलक साजिश फैली मक्कारों की !

सीमा पार पे डेरा डाले आतंकी हत्यारों की !
अब उनको मिटाकर दम लेंगे ये दिल में ठानी है !!
यह देश जहां पर राणा की तलवार नहीं बिकती!
जहां लक्ष्मीबाई गोरों के आगे भी नहीं झुकती !
उस देश को आंखें दिखलाना बिल्कुल नादानी है !!

हम जानते हैं शमशीर से कैसे नक्शा बनता है!
कायर बैरी की करतूतों का तमाशा बनता है!
हम बाघ पालने वालों की दुनिया दीवानी है !!
किसकी कितनी है दुनिया में औकात दिखानी है !!

फिर से इक बेटा सोया है आज तिरंगा ओढ़कर!!


 

कितनी ख़्वाहिश कितने सपने आधेअधूरे छोड़कर!
फिर से इक बेटा सोया है आज तिरंगा ओढ़कर!!

घर के कोने में अब भी शहनाई की स्वरलहरी है
अभी चूड़ियों की खन खन ही कहां चैन से ठहरी है
अभी बना था एक घोंसला तिनका तिनका जोड़कर !!

भारत मां को आंख दिखा जब दुश्मन ने नादानी की
जन्मभूमि की सुन पुकार तब बेटों ने कुरबानी दी
पंछी ने परवाज भरी है तन का पिंजरा तोड़ कर !!

अपने वतन को रोशन करके एक सितारा डूब गया
पार उतरते ही कश्ती के एक किनारा डूब गया
चलते चलते जयी बना, रुख तूफानों का मोड़ कर !!

बारूदों के ढेर से तेरा क़द ना नापा जायेगा
अब गुलाब के बाग लगा ले काम वही बस आयेगा
विश्वयुद्ध छिड़ जाये कहीं ना शस्त्रों की मत होड़ कर !!

मेरे वतन के शेर




कूद रहे हर पाकिस्तानी चूहे को
मेरे वतन के शेर मिला दो मिट्टी में!
मत करना अब देर मिला दो मिट्टी में !!

काश्मीर में घात लगाये मिल जायेंगे जब चाहो
थोड़ा सा भी ज़ोर लगाओ हिल जायेंगे जब चाहो
इनको अब लो घेर मिला दो मिट्टी में !!


वैमनस्य का बीज बो रहे भाड़े के किरदार यहां
दो-दो कौड़ी में बिकते हैं धर्म के ठेकेदार यहां
ख़त्म करो अंधेर मिला दो मिट्टी में !!

दहशतगर्दी ईमां जिनका खून खराबा फ़ितरत है
भारत को बरबाद देखना जिनकी पुरानी हसरत है
कर दो उनको ढेर मिला दो मिट्टी में !!

तेरी कुर्बानियों पर फ़िदा हम



कर सो सरहद की बेशक हिफ़ाज़त
घर भी लौटो कि हम चाहते हैं!
तेरी कुर्बानियों पर फ़िदा हम
चूमें तेरे क़दम चाहते हैं!!

मां की आंखों का तुम नूर हो और
बूढ़े पापा की लाठी तुम्हीं हो
तुम ही शृंगार हो इक दुल्हन के
भोली बहनों की राखी तुम्हीं हो
भाई ढूंढे , सभी संगीसाथी
तुमको ही हमक़दम चाहते हैं !!

तेरे दम पे टिका है हिमालय
तुमसे ही गंगा यमुना में पानी!
तुमसे ही सीखता है ज़माना
काम आती है कैसे जवानी!
हम भी तेरी तरह इस ज़मीं पर
हो दुबारा जनम चाहते हैं!!

पूरी दुनिया का सिरमौर भारत
चुभ रहा जाने किसकी नज़र में!
नफ़रतों के बवंडर उठे हैं
बारूदें बिछ गयीं हर डगर में!
तुम अमन के सिपाही लड़ोगे
उनसे जो भी सितम चाहते हैं!!

तुममें वेदों की सारी ऋचाएं
तुममें गीता के संदेश सारे!
तुममें कुरआन की आयतें हैं
तुममें बाइबिल के उपदेश सारे!!
जब भी हथियार तेरे उठे हैं
बैरी तुझसे रहम चाहते हैं!!