9/19/2010

मौका आज चुनाव का

मतदाताओं के प्रतिः गीत
पांच साल में फिर आया है
मौका आज चुनाव का।
चुन लो यारो, खुद ही चुन लो
मरहम अपने घाव का।

किसके बल पर करनी हमको दुनिया की अगुवाई
किसकी बांट जोहती अपने नवयुग की तरुणाई
कौन संदेशा लेकर आया
स्थिति में बदलाव का।
पांच साल में फिर आया है
मौका आज चुनाव का।

कौन हमारी साझी विरासत का रखवाला होगा
किस ध्रुवतारे पर रीझें हम, किससे उजाला होगा
कौन बनेगा सेतु हमारे
अनचाहे अलगाव का।
पांच साल में फिर आया है
मौका आज चुनाव का।

बांट नहीं पाती फिरकों में हर ताक़त नाकाम है
जहां भी जाग्रत, जहां भी चौकस हर पल ही आवाम है
टिकी नहीं चट्टान कोई भी
रोके राह बहाव का।
पांच साल में फिर आया है
मौका आज चुनाव का।

2 टिप्‍पणियां:

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

लेकिन यहां लोगों को अक़्ल कहां आती है.

Sumana ने कहा…

bahut hi achhi baat kahi hai aapne ........... magar log samajhte kahan?