9/28/2013

माडर्न आर्ट से पहले रियलिस्टिक काम सीखना जरूरी



वरिष्ठ चित्रकार व इंडियन आर्ट कालेज के पूर्व प्रिंसिपल होरीलाल साहू से डॉ. अभिज्ञात की बातचीत

प्रश्न: कोलकाता के समकालीन परिदृश्य पर बतायें। समकालीन चित्रकला की दुनिया में यहां इन दिनों क्या चल रहा है? खास तौर पर क्या चल रहा हैै?
उत्तर : कोलकाता गवेषणा की जगह है। इन दिनों कोलकाता में जो काम हो रहा है, उसमें माडर्न आर्ट का ज्यादा महत्व है। यद्यपि मेरी जान-पहचान के जो लोग हैं, उनका कहना है कि यह माडर्न आर्ट उनकी समझ में नहीं आता है। लेकिन ऊंचे लोग जो हैं.. समझदार लोग है वे सोचते हैं यही आर्ट कला है यही असली कला है। इसलिए उसका महत्व ज्यादा है। कोलकाता ने इधर कई बड़े आर्टिस्टों को खो दिया है जैसे गणेश पाइन नहीं रहे जिन्हें माडर्न आर्ट की प्रमुख शख्सियत माना जाता है। अब जो हैं उनके शिष्य हैं उनका अनुकरण करने वाले लोग हैं। जो उनकी परंपरा जारी रखे हैं और काम कर रहे हैं शोध कर रहे हैं। एकेडमी आफ फाइन आट्र्स में चित्रकला की जितनी प्रदर्शनी लगती है उसमें 80 प्रतिशत प्रदर्शनियां माडर्न आर्ट की होती हैं। देखा जाता है कि विदेश से आयी विभिन्न तकनीक पर काम हो रहा है। कलर को लेकर प्रयोग हो रहे हैं... जैसे पानी और आयल का मिश्रण चल रहा है। आयल कलर का जैसा इस्तेमाल हो रहा वैसा पहले नहीं हुआ था। पता नहीं वह कितने दिन चलेगा। जैसे एनामिल कलर में पानी देने से अद्भुत माडर्न आर्ट लगता है।
प्रश्न: आपने कहा कि कुछ बड़े कलाकार अब नहीं रहे जिनमें गणेश पाइन के साथ एक और नाम है विकास भट्टाचार्य का। इन दोनों का समकालीन कला पर क्या प्रभाव पड़ा है?
उत्तर: विकास भट्टाचार्य तो सुर्रिलियलिस्टिक काम करते थे। यह पूरा-पूरा माडर्न आर्ट नहीं था अन्त में जरूर उन्होंने कुछ स्केच बनाये थे। गणेश पाइन तो टोटली मार्डन आर्ट करते थे। वे रियलिस्टिक काम करते ही नहीं थे। रियलिस्टिक कला को मानने वाले विकास को फालो कर रहे हैं जबकि माडर्न आर्ट वालों के नायक गणेश पाइन हैं।
प्रश्न: कला में विरूपण का भी ट्रेंड है। जैसे सूजा और अपने कोलकाता के चित्रकार रबीन मंडल.. किसी हद तक प्रकाश कर्मकार भी..। माना यह जाता है कि कलाकार दुनिया की खूबसूरती को व्यक्त करे या उसके खूबसूरत पहलू को व्यक्त करे..
उत्तर: प्रकाश कर्मकार जो चित्र बना रहे हैं यह विमूर्त कला है चीज को तोड़ा जाता है किन्तु विमूर्तता का अर्थ नग्नता नहीं लेना चाहिए। प्रकाश कर्मकार की विमूर्तता में नग्नता है, जो मुझे कुछ कम जंचती है। पिकासो ने यह किया था उसको आर्ट माना गया प्रकाश कर्मकार को भी इज्जत मिल रही है क्योंकि पुराने काम करने वाले हैं, 90 की उम्र हो रही है।
प्रश्न : वसीम कपूर व शुभप्रसन्न की कला के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
उत्तर-वासिम रियलिस्टिक हैं उसमें आब्सट्रैक्ट घुसाते हैं लेकिन गंदगी नहीं है। वसीम अच्छे आर्टिस्टों में गिने जायेंगे जितना काम किया है अच्छा तथा जीसस क्राइस्ट को लेकर उनके काम को अधिक याद किया जायेगा। शुभप्रसन्न का काम पूरी तरह अमूर्त नहीं है आब्स्ट्रेक्ट के साथ-साथ उनका रियलिस्टिक काम भी है।
प्रश्न : कोलकाता में आर्ट गैलरियों की संख्या बढ़ रही है उसके क्या कारण हैं?
उत्तर: फ्लैट बन रहे हैं उसमें बहुत सी पेंटिंग खप रही है। बिल्डर फ्लैट के साथ पेंटिंग की भी दर तय कर देते हैं।
प्रश्न: क्या बाजार कला की गुणवत्ता को नष्ट करता है?
उत्तर: प्रोत्साहित भी तो करता है। बिक्री से कलाकारों को नया जोश मिलता है।
प्रश्न : कोई बच्चा कला सीखना चाहता हो तो क्या संभावना है, उसे कहां सीखना चाहिए?
उत्तर: बच्चों को स्कूल से सीखना चाहिए। माडर्न आर्ट के चक्कर में नहीं पडऩा चाहिए। पहले रियलिस्टिक काम सीखें फिर प्रयोग करें। वे नेहरू म्यूजियम और एकेडमी आफ फाइन आट्र्स में सीख सकते हैं। ये पाठ्यक्रम 3-4 साल के होते हैं।
प्रश्न : कैरियर के तौर पर कला के क्षेत्र में क्या संभावना है?
उत्तर: चित्रकला एक टेक्निकल लाइन है। आर्ट कालेज से डिग्री लेने के बाद केंद्रीय विद्यालय के 300 से अधिक स्कूल हैं, जिनमें कला के अध्यापन का अवसर मिल सकता है। कालेज आफ इंडोलोजी व म्यूजियम में नौकरी है, एडवरटाइजिंग एजेंसी में भी उन्हें नौकरी मिल सकती है।
प्रश्न : शांतिनिकेतन में कला की शिक्षा के सम्बंध में क्या कहेंगे?
उत्तर: शांति निकेतन में अनुकरण करते थे नंदलाल बोस का फिर जो नया ग्रुप गया वहां माडर्न आर्ट पढ़ाया जाने लगा।
प्रश्न: पश्चिम बंगाल में कला ग्राम की योजना की कुछ अरसे पहले चर्चा थी उसका क्या हुआ?
उत्तर: यहां आर्ट एकर बना था किन्तु वह कुछ कारणोंवश विफल हो गया.. अब फिर शुभप्रसन्न एक और आर्ट विलेज की योजना बना रहे हैं..।
प्रश्न: पूरे देश के कला परिदृश्य में कोलकाता कहां है?
उत्तर: अब बेंगलूर और चेन्नई में माडर्न आर्ट में प्रयोग हो रहे हैं फिर भी कोलकाता का अपना महत्व बरकरार है।

2 टिप्‍पणियां:

Lalit Chahar ने कहा…

आपने लिखा....हमने पढ़ा....
और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल में शामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा {रविवार} 29/09/2013 को पीछे कुछ भी नहीं -- हिन्दी ब्लागर्स चौपाल चर्चा : अंक-012 पर लिंक की गयी है। कृपया आप भी पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें। सादर ....ललित चाहार

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : भारतीय संस्कृति और कमल