3/14/2010

गज़ल

वो मुझको तोड़ेगा, नाकाम करके खेलेगा।
नया खिलौना कोई फिर से हाथ ले लेगा।


1 टिप्पणी:

संजय भास्कर ने कहा…

आपने बड़े ख़ूबसूरत ख़यालों से सजा कर एक निहायत उम्दा ग़ज़ल लिखी है।